भारत की प्रायद्वीपीय नदियाँ एवं जल प्रपात

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भारत की प्रायद्वीपीय नदियाँ ,भारत की प्रायद्वीपीय नदियां चौड़ी लगभग संतुलित एवं उथली घाटियों से होकर प्रवाहित होती हैं ।  विशाल मैदानों की अपेक्षा यहां की नदियां छोटी और कम संख्या में हैं, क्योंकि यहां पर वर्षा कम होती है । इस कारण इन नदियों में गर्मी या ग्रीष्म ऋतु में जल की मात्रा बहुत कम हो जाती है।

भारत की प्रायद्वीपीय नदियां हिमालय नदियों की तुलना में बहुत ही अधिक पुरानी हैं, एवं यह नदियां प्रौढ़ा अवस्था को प्राप्त कर चुकी हैं।  इसलिए इन नदियों की ढाल प्रवणता अत्यंत धीमा है।  केवल उन्हीं हिस्से में इसका अपवाद है,  जहां पर नया भ्रंशन हुआ है ।

भारत-की-प्रायद्वीपीय-नदियाँ-एवं-जल-प्रपात

 

भारत के प्रायद्वीपीय क्षेत्र की अधिकांश नदियां पूर्व की ओर प्रवाहित होती हैं, क्योंकि इनका मुख्य जल विभाजक पश्चिमी घाट है, केवल नर्मदा और ताप्ती नदी सामान्य बहाव की दिशा के विपरीत पूर्व से पश्चिम की तरफ उन भ्रंश द्रोहियों से होकर प्रवाहित होती है, जो उनके द्वारा निर्मित नहीं है, इसलिए इन दोनों नदियों की घाटी में जलोढ़ एवं डेल्टा ई निक्षेपो की कमी मिलती है।

यह नदियां सिर्फ वर्षा जल पर ही  निर्भर होने के कारण भारत की प्रायद्वीपीय नदियां मौसमी हैं गर्मियों के लंबे संस्कृत में यह नदियां प्रायः सूख जाती हैं, इसी कारण इन नदियों का सिंचाई स्रोत के रूप में महत्व कम है, ठोस पठारी भाग में प्रवाहित होने के कारण इन नदियों का मार्ग सीधा तथा सामान्य रैखिक है, क्योंकि जलोढ़ ने खेतों की इनमें  प्रमुख रूप से कमी पाई जाती हैं।  पठारी क्षेत्रों से होने के कारण इन नदियों में विसर्पण  की क्रिया प्रभावी नहीं हो पाती है।

Table of Contents

  भारत की प्रायद्वीपीय नदियाँ एवं जल प्रपात : भारत के प्रायद्वीपीय नदियों को मुख्यरूप से  दो भागों में विभाजित किया जाता –

 प्रथम भाग- बंगाल की खाड़ी में  जल गिराने  वाली नदियां

 द्वितीय भाग – अरब सागर में जल गिराने वाली नदियां

भारत की प्रायद्वीपीय नदियाँ एवं जल प्रपात  : प्रथम भाग – बंगाल की खाड़ी में जल गिराने वाली नदियां

दामोदर नदी-:

  • दामोदर नदी छोटा नागपुर पठार के बीचोबीच से भ्रंश घाटी की ओर प्रवाहित होते हुए हुगली नदी में समाहित हो जाती है अर्थात दामोदर नदी अपना जल मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी में ना गिरा कर हुगली नदी के माध्यम से बंगाल की खाड़ी में अपना जल विसर्जित करती है|

 स्वर्णरेखा नदी-:

  • स्वर्णरेखा नदी झारखंड की राजधानी रांची के बिल्कुल समीप से  निकलती है
  • स्वर्णरेखा नदी उड़ीसा के तट पर अपना मुहाना बनाती है।
  • छोटा नागपुर पठार एक औद्योगिक शहर है जिससे औद्योगिक इकाइयों का कचरा स्वर्णरेखा नदी में गिराया जाता है, जिसके कारण स्वर्णरेखा नदी बहुत ही प्रदूषित हो चुकी हैं।
  • जमशेदपुर स्वर्णरेखा नदी के तट पर है।
  • स्वर्णरेखा नदी में अत्यधिक  प्रदूषित होने के कारण इस नदी में जलीय जीव नहीं पाए जाते हैं।  जिसके कारण इस नदी को जैविक मरुस्थल भी कहा जाता है ।

 बैतरणी नदी-:

  • यह नदी उड़ीसा के क्योंझर पठार से निकलती है ।

  • बाय तरणी नदी केवल उड़ीसा राज्य में ही प्रवाहित होती है।

 ब्राह्मणी नदी-:

  • ब्राह्मणी नदी भी रांची के समीप से निकलती है एवं उड़ीसा के तट पर अपना मुहाना बनाती है।
  • यह नदी कोयल व शंख नदियों से मिलकर बनी है, जिसकी लंबाई 420 किलोमीटर है।

 महानदी-:

  • महानदी कोयल वसंत नदियों के संगम से मिलकर छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में सिंगह्व से निकलकर पूर्व  व दक्षिण पूर्व की ओर प्रवाहित होते हुए कटक के पास बड़ा डेल्टा का निर्माण करती है।
  • शिवनाथ, हंस देव, मंड एवं डूब नदियां उत्तर की तरफ से इसमें आकर मिल जाती हैं।
  • जोक वा तेल नदी दक्षिण की ओर से आकर इस नदी में मिलती है।
  • हीराकुंड वाटर पारा बांध इस नदी पर मुख्य रूप से बहुउद्देशीय परियोजनाएं हैं।

 गोदावरी नदी -:

  • भारत की प्रायद्वीपीय नदियों में से गोदावरी नदी सबसे लंबी नदी है।
  • इस नदी की लंबाई  किलोमीटर है।
  • गोदावरी नदी को बूढ़ी गंगा कहा जाता है।
  • यह नदी  महाराष्ट्र में पश्चिमी घाट पहाड़ी के नासिक के त्रयंबकम नामक जिले से निकलती है।
  • यह नदी 3 राज्यों  – महाराष्ट्र ,तेलंगाना, और आंध्र प्रदेश से होकर प्रवाहित होती हैं।
  • यह नदी राजमुंद्री के निकट अपना डेल्टा बनाती है ।
  • इस नदी की सहायक नदियां-: मंजीरा नदी , प्रवरा पूजा नदी, वैनगंगा नदी पैनगंगा नदी, प्राणहिता नदी, इंद्रावती नदी एवं मंजीरा नदी।

कृष्णा नदी-:

  • भारत की प्रायद्वीपीय नदियों में से, कृष्णा दूसरी सबसे बड़ी नदी है ।
  • कृष्णा नदी पश्चिम घाट पर्वत के महाबलेश्वर चोटी से निकलती है और 4 राज्यों  महाराष्ट्र कर्नाटक तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश से होकर प्रवाहित होती है।
  • कृष्णा नदी विजयवाड़ा के पास डेल्टा बनाती है।
  • कृष्णा नदी की प्रमुख सहायक नदियां कोएना ,यारा , वर्णा,  पंचगंगा ,दूध गंगा, घटप्रभा, माल प्रभा, भीमा ,तुंगभद्रा और  मूसी है ।
  • तुंगभद्रा की सहायक नदी हगरी है, हगरी नदी को वेदावती  नाम से भी जाना जाता है।

 कावेरी नदी-:

  • यह नदी पश्चिम घाट के ब्रम्हगिरी या पूर्ण गिर से निकलती है, तथा 2 राज्यों कर्नाटक और तमिलनाडु से होकर प्रवाहित होती है।
  • कावेरी नदी को “दक्षिण भारत की गंगा” कहा जाता है
  • यह नदी शिवसमुद्रम नामक प्रसिद्ध जलप्रपात बनाती है।
  • इस नदी के प्रवाह क्षेत्र को “राइस बाउल ऑफ साउथ इंडिया” कहा जाता है ।
  • भारत की प्रायद्वीपीय नदियों में से इस नदी में ही वर्षभर जल प्रवाह बना रहता है।

 पेन्नार नदी-:

  • इस नदी का उद्गम स्थल कर्नाटक के कोलार जिले नंदी दुर्ग पहाड़ी से होता है।
  • इस नदी की प्रमुख सहायक नदियां  जय मंगली , कुंदेरू ,  शागीलेरू,, चित्रावली, पापा सनी है।

 वैगई नदी-:

  • किस नदी का उद्गम स्थल तमिलनाडु के मदुरई जिले की वरशा नद पहाड़ी से होता है।

द्वितीय भाग-: अरब सागर में गिरने वाली नदियां

 नर्मदा नदी-:

  • इस नदी का उद्गम स्थल मैकाल पर्वत की अमरकंटक चोटी से है।
  • इस नदी की लंबाई1312 किलोमीटर  है।
  • अरब सागर में गिरने वाली भारत की प्रायद्वीपीय नदियों में यह नदी सबसे बड़ी नदी है।
  • इस नदी के उत्तर में विंध्याचल पर्वत और दक्षिण में सतपुड़ा पर्वत है, इसके बीच में यह नदी भ्रंश घाटी में प्रवाहित होती है ।
  • इस नदी की सर्वाधिक लंबाई मध्यप्रदेश में हैं।
  • यह नदी जबलपुर के पास भेड़ाघाट की संगमरमर चट्टानों में एक बहुत ही सुंदर जलप्रपात बनाती है, जिसे धुआंधार जलप्रपात या कपिलधारा जलप्रपात कहा जाता है।
  • नर्मदा नदी के तट पर जबलपुर एवं भड़औच  शहर स्थित है।

तापी (ताप्ती नदी )-:

  • इस नदी का उद्गम स्थल  मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से मुलताई नामक स्थान के पास सतपुड़ा प्श्रेणी से होता है ।
  • यह नदी सतपुड़ा तथा अजंता पर्वतों के बीच भ्रंश घाटी में प्रवाहित होती है।
  • यह नदी नर्मदा नदी के समानांतर सतपुरा के दक्षिण सेवा कर खंभात की खाड़ी में गिरती है।
  • इस नदी के मुहाने पर सूरत नगर स्थित ह।
  • इस नदी का जल उपयोग काकरापार एवं  उकाई परियोजनाओं द्वारा होता है ।

 साबरमती नदी-:

  • साबरमती नदी राजस्थान के मेवाड़ पहाड़ियों से निकलकर खंभात की खाड़ी में अपना जल गिराती है।
  • अहमदाबाद शहर इस नदी के किनारे स्थित है।
  • यह नदी गुजरात की राजधानी गांधीनगर से होकर प्रवाहित होती हैं।
  • यह नदी पश्चिम दिशा में प्रवाहित होने वाली नदियों में तीसरी सबसे बड़ी नदी है।

 माही नदी-: 

  • इस नदी का उद्गम स्थल मध्य प्रदेश के विंध्य पर्वत से होता है।
  • यह नदी अपना जल खंभात की खाड़ी में गिराती है।
  • यह नदी 3 राज्य में मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं गुजरात से होकर प्रवाहित होती हैं।
  • यह नदी कर्क रेखा को दो बार काटती है।

लूनी नदी-:

  • इस नदी का उद्गम स्थल अरावली पहाड़ी से होता है एवं सांभर झील से गुजरते हुए कच्छ के दलदल में विलीन हो जाता है।
  • इस नदी को समुद्र तट नहीं मिल पाता है।

 घग्गर नदी-:

  • इस नदी काउद्गम स्थल हिमालय पर्वत की शिवालिक पहाड़ियों  से शिमला के पास से होता है।
  • इस नदी की कुल लंबाई 465 किलोमीटर है।

भारत के महत्त्वपूर्ण जलप्रपात –

जल प्रपात ऊँचाई (मी.) नदी स्थान
जोग/गरसोप्पा या महात्मा गांधी 225 शरावती कर्नाटक
शिवसमुद्रम 183 येना महाबालेश्वर
हुंडरू 74 स्वर्णरेखा झारखंड
चुलिया 18 चम्बल राजस्थान
धुँवा धार नर्मदा जबलपुर

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